Saturday, 26 January 2019
आज प्राइमरी स्कूल गणतंत्र दिवस धूम धाम से मनाया गया
Friday, 25 January 2019
मेहरबान अंसारी ने बताया गणतंत्र दिवस के बारे में
Thursday, 6 December 2018
🍀 तहजीब मर जाने की कहानी है अयोध्या 🍀
🍀 तहजीब मर जाने की कहानी है अयोध्या 🍀
कहते हैं अयोध्या में राम जन्मे. वहीं खेले कूदे बड़े हुए. बनवास भेजे गए. लौट कर आए तो वहां राज भी किया. उनकी जिंदगी के हर पल को याद करने के लिए एक मंदिर बनाया गया. जहां खेले, वहां गुलेला मंदिर है.
जहां पढ़ाई की वहां वशिष्ठ मंदिर हैं. जहां बैठकर राज किया वहां मंदिर है. जहां खाना खाया वहां सीता रसोई है. जहां भरत रहे वहां मंदिर है. हनुमान मंदिर है. कोप भवन है. सुमित्रा मंदिर है. दशरथ भवन है. ऐसे बीसीयों मंदिर हैं. और इन सबकी उम्र 400-500 साल है. यानी ये मंदिर तब बने जब हिंदुस्तान पर मुगल या मुसलमानों का राज रहा.
अजीब है न! कैसे बनने दिए होंगे मुसलमानों ने ये मंदिर! उन्हें तो मंदिर तोड़ने के लिए याद किया जाता है. उनके रहते एक पूरा शहर मंदिरों में तब्दील होता रहा और उन्होंने कुछ नहीं किया! कैसे अताताई थे वे, जो मंदिरों के लिए जमीन दे रहे थे. शायद वे लोग झूठे होंगे जो बताते हैं कि जहां गुलेला मंदिर बनना था उसके लिए जमीन मुसलमान शासकों ने ही दी. दिगंबर अखाड़े में रखा वह दस्तावेज भी गलत ही होगा जिसमें लिखा है कि मुसलमान राजाओं ने मंदिरों के बनाने के लिए 500 बीघा जमीन दी. निर्मोही अखाड़े के लिए नवाब सिराजुदौला के जमीन देने की बात भी सच नहीं ही होगी.
सच तो बस बाबर है और उसकी बनवाई बाबरी मस्जिद! अब तो तुलसी भी गलत लगने लगे हैं जो 1528 के आसपास ही जन्मे थे. लोग कहते हैं कि 1528 में ही बाबर ने राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई. तुलसी ने तो देखा या सुना होगा उस बात को. बाबर राम के जन्म स्थल को तोड़ रहा था और तुलसी लिख रहे थे मांग के खाइबो मसीत में सोइबो. और फिर उन्होंने रामायण लिखा डाली. राम मंदिर के टूटने का और बाबरी मस्जिद बनने क्या तुलसी को जरा भी अफसोस न रहा होगा! कहीं लिखा क्यों नहीं!
अयोध्या में सच और झूठ अपने मायने खो चुके हैं. मुसलमान पांच पीढ़ी से वहां फूलों की खेती कर रहे हैं. उनके फूल सब मंदिरों पर उनमें बसे देवताओं पर.. राम पर चढ़ते रहे. मुसलमान वहां खड़ाऊं बनाने के पेशे में जाने कब से हैं. ऋषि मुनि, संन्यासी, राम भक्त सब मुसलमानों की बनाई खड़ाऊं पहनते रहे. सुंदर भवन मंदिर का सारा प्रबंध चार दशक तक एक मुसलमान के हाथों में रहा. 1949 में इसकी कमान संभालने वाले मुन्नू मियां 23 दिसंबर 1992 तक इसके मैनेजर रहे. जब कभी लोग कम होते और आरती के वक्त मुन्नू मियां खुद खड़ताल बजाने खड़े हो जाते तब क्या वह सोचते होंगे कि अयोध्या का सच क्या है और झूठ क्या?
अग्रवालों के बनवाए एक मंदिर की हर ईंट पर 786 लिखा है. उसके लिए सारी ईंटें राजा हुसैन अली खां ने दीं. किसे सच मानें? क्या मंदिर बनवाने वाले वे अग्रवाल सनकी थे या दीवाना था वह हुसैन अली खां जो मंदिर के लिए ईंटें दे रहा था? इस मंदिर में दुआ के लिए उठने वाले हाथ हिंदू या मुसलमान किसके हों, पहचाना ही नहीं जाता. सब आते हैं. एक नंबर 786 ने इस मंदिर को सबका बना दिया. क्या बस छह दिसंबर 1992 ही सच है! जाने कौन.
छह दिसंबर 1992 के बाद सरकार ने अयोध्या के ज्यादातर मंदिरों को अधिग्रहण में ले लिया. वहां ताले पड़ गए. आरती बंद हो गई. लोगों का आना जाना बंद हो गया. बंद दरवाजों के पीछे बैठे देवी देवता क्या कोसते होंगे कभी उन्हें जो एक गुंबद पर चढ़कर राम को छू लेने की कोशिश कर रहे थे? सूने पड़े हनुमान मंदिर या सीता रसोई में उस खून की गंध नहीं आती होगी जो राम के नाम पर अयोध्या और भारत में बहाया गया?
अयोध्या एक शहर के मसले में बदल जाने की कहानी है. अयोध्या एक तहजीब के मर जाने की कहानी है.
लेखः विवेक कुमार असरी का 6 साल पुराना लेख
Tuesday, 4 December 2018
वो मंदिर नहीं फिर से सरकार बनाना चाहते हैं देश में मूर्ख कितने हैं वो फिर आजमाना चाहते हैं
#देश #में #मूर्ख #कितने #हैं.... #वो #फिर #आजमाना #चाहते #हैं
बुलंदशहर के सायना में जो बवाल हुवा है में अपको एक बात बताना चाहता हु यह झगड़ा पूरी तरहा से प्लान कर के किया गया था ताकि हिन्दू मुस्लिम आपस में लडे मगर सब कुछ फेल हो गया में आपको एक और बात बताना चाहता हु में जब इज्तिमे में गया तो मैंने देखा हिन्दू भाई सेवा कर रहे और वो भी दिन रात मंदिर खोल दी नमाज पढ़ने के लिए उस वक़्त जब मैंने यह देखा तो मेरे मोबाइल की बैटरी खत्म हो चुकी थी मुझे लगता है यह सब हजम नही हुवा इन दंगाईयो को प्यार और मोहब्बत की जो मिशाल पेश की है बुलंदशहर वासियों ने जितनी तारीफ की जाये कम है ऐसे भाइयो को में दिल से सैल्यूट करता हू दंगा कराने की इन लोगो की साजिश नाकाम हो चुकी है में आप सब भाईयो से अपील करता हु इन लोगो के चक्कर में ना आए यह सिर्फ अपनी राजनीती की रोटिया सेकना चाहते है इनके चक्कर में आपसी रिश्ते ख़राब ना करे यह लोग आगे भी कोशिस करेंगे ऐसा माहौल पैदा करने की बस आप समझदारी का सबूत दे कोई किसी भी धर्म से हम सब आपस में मिल जुलकर रहेंगे तो यह दँगाई कभी कामयाब नही होंगे यह तस्वीरे में जो पोस्ट कर रहा हु किसी और से लेकर कर रहा हु यह दंगा फैलने से रोकने गए कुछ लोगो ने कॉल की थी इसलिए सुबोध जी वहा गए वहा कुछ नही था इंस्पेक्टर सुबोध जी की हत्या हो गयी देश का एक जाबांज सिपाही सहीद हो गया सलाम इंस्पेक्टर साहब को जिन्होंने अपनी अपनी जान की बाजी लगा दी बस में तो यही कहना चाहूँगा अगर इस आर्टिकल में कही गलती हो गयी है तो माफ करना
#नफरत #की #लाठी #छोड़ो, #लालच #का #खंजर #फेको #मेरे #देश #प्रेमियो #आपस में #प्रेम करो #देश #प्रेमियो
Maharban Ansari kairana
Thursday, 18 October 2018
इस्लामिया स्कूल में टीचरो को किया सम्मानित
इस मोके पर मौजूद सभासद गय्युर अली,मुरसलीन भाई ,नोशाद भाई ,साहिद मास्टर सलमान मास्टर वसीक मास्टर वादिल बाबू शाहनवाज़ और तमाम स्कूल स्टाफ मौजूद रहा
मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद
Monday, 15 October 2018
मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद कैराना नगरपालिका परिषद
मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद नगरपालिका परिषद कैराना
Sunday, 14 October 2018
मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद ने वोट बनवाने में लोगो की मदद हर तरफ हो रही है सरहाना
मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद नगरपालिका परिषद कैराना

















