रमजान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है. यह महीना हर मुसलमान के लिए बहुत मायने रखता है. ये इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना होता है. इस्लाम धर्म के लोगों का मानना है कि रमजान के महीने में जन्नत यानी स्वर्ग के दरवाजें खुल जाते हैं और इस पवित्र महीने में हर दुआ पूरी होती है. रजमान को लेकर ये भी कहा जाता है कि अगर मुसलमानों को रमजान के महीने की अहमियत का पता चला जाए तो हर मुसलमान यही ख्वाहिश करेगा कि रमजान 1 महीने नहीं बल्कि पूरे साल तक रहें.
आपको बता दें कि इस्लाम धर्म में रोजा छोड़ने को गुनाह-ए-कबीरा माना जाता है. गुनाह-ए-कबीरा का मतलब होता है वो बड़ा पाप जिसकी कोई माफी ही नहीं होती है. रोजे के बारे में इस्लामिक किताबों में कहा गया है कि अल्लाह अपने बंदों से फरमाते हैं, 'रोजा सिर्फ मेरे लिए है और रोजे का इनाम मैं खुद अपने बंदों को दूंगा.'
आपको ये भी बता दें कि इस्लाम में 7 सात साल की उम्र के बाद से हर एक इंसान के लिए रोजा रखना जरूरी माना जाता है. हालांकि, 7 साल की उम्र से छोटे बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं, बीमार और सफर करने वाले लोगों को रोजा रखने की छूट दी गई है.
हर बार रमजान के महीने में कई लोगों के मन ये सवाल जरूर आता है कि आखिर रोजा किन चीजों से टूटता है और किन चीजों से नहीं. रोजा टूटने को लेकर कई मुसलमानों को कई तरह की गलतफहमियां रहती हैं. तो आइए इसी गलतफहमी को दूर करने के लिए आज हम आपको बता रहे हैं कि रोजा आखिर किन चीजों से टूटता है और किन चीजों नहीं.
सबसे पहली बात तो यह कि कई लोगों को लगता है कि रोजा रखने का मतलब सिर्फ भूखा प्यासा रहना ही होता है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. बता दें कि रोजे का मतलब सिर्फ खाने पीने की चीजों से दूरी बनाना नहीं होता है, बल्कि रोजा रखने के बाद इंसान को हर उस काम से दूर रहना पड़ता है, जो इस्लाम धर्म में मना की गई हैं.
खाने पीने की चीजों से दूरी बनाने के साथ आंख, नाक, कान, मुंह सभी चीजों का रोजा होता है. इसका मतलब ये है कि रोजा रखने के बाद इंसान ना तो किसी की बुराई कर सकता है और ना ही किसी का दिल दुखा सकता है. इस तरह मुसलमान रमजान के महीने में हर तरह की बुराइयों से पवित्र हो जाता है.
कई लोग रोजा रखने के बाद भूले से कुछ खा-पी लेते हैं और इस डर से वो रोजा तोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि भूले से खाने के बाद उनका रोजा टूट गया है. लेकिन ऐसा नहीं है. दरअसल, रोजे के दौरान अगर कोई इंसान अनजाने में कुछ खा-पी लेता है, तो इससे रोजा नहीं टूटता है. इस्लामिक धर्म गुरु का मानना है कि अगर गलती से रोजा रखकर आप कुछ खा-पी लेते हैं तो आपको अपना रोजा पूरा करना चाहिए.
कुछ इस्लामिक धर्म गुरु का मानना है कि रोजा रखने के बाद टूथपेस्ट नहीं करना चाहिए, क्योंकि टूथपेस्ट करने से रोजा टूट जाता है. लेकिन बता दें, अगर टूथपेस्ट गले में नहीं पहुंचता है और इसका टेस्ट भी मुंह में नहीं रहता है तो रोजा नहीं टूटता. लेकिन अगर टूथपेस्ट गले तक पहुंच जाता है और इसका टेस्ट देर तक मुंह में रहता है तो रोजा टूट जाता है. बेहतर यही होगा कि रोजे के दौरान टूथपेस्ट करने के बजाए मिस्वाक से दांतों को साफ करें. मिस्वाक करने से रोजा नहीं टूटता है.
गर्मी की शिद्दत से बचने के लिए अगर कोई इंसान रोजा रखने के बाद सिर पर पानी डालता है, तो उससे भी रोजा नहीं टूटता है. रोजे की हालत में नहाने से भी रोजा नहीं टूटता है. इसलिए रोजा रखकर कभी भी किसी भी वक्त नहा सकते हैं.
कई लोगों का मानना है कि रोजा रखने के बाद सिर में तेल लगाने से रोजा टूट जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है. रोजा रखकर सिर में तेल और आंखों में सुरमा दोनों ही लगाएं जा सकते हैं.
कुछ लोगों को लगता है कि रोजे की हालत में थूक निगलने से रोजा टूट जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है अगर मुंह के अदंर का थूक गले में जाता है तो इससे रोजा नहीं टूटता है. लेकिन अगर कोई शख्स जानकर गले में नमी लाने के लिए अपना थूक निगलता है तो इससे रोजा टूट जाता है
रोजे के दौरान नाक, कान और आंख में दवाई डालने के लिए भी मना किया जाता है, क्योंकि आंख, कान और नाक का ताल्लुक गले से होता है. ऐसे में दवाई गले तक पहुंच जाती है और रोजदार रोजा रखने वाले के गले में कुछ भी पहुंचता है तो इससे रोजा टूट जाता है.
रोजे की हालत में सिगरेट पीने, पान चबाने, तंबाकू खाने से भी रोजा टूट जाता है.
रोजे के दौरान शारीरिक संबंध बनाने से भी रोजा टूट जाता है.
Tuesday, 7 May 2019
रोजे के बारे में विस्तार से जाने
Sunday, 31 March 2019
चौधरी तब्बसुम मुनव्वर हसन का तूफानी दौरा
Saturday, 26 January 2019
आज प्राइमरी स्कूल गणतंत्र दिवस धूम धाम से मनाया गया
Friday, 25 January 2019
मेहरबान अंसारी ने बताया गणतंत्र दिवस के बारे में
Thursday, 6 December 2018
🍀 तहजीब मर जाने की कहानी है अयोध्या 🍀
🍀 तहजीब मर जाने की कहानी है अयोध्या 🍀
कहते हैं अयोध्या में राम जन्मे. वहीं खेले कूदे बड़े हुए. बनवास भेजे गए. लौट कर आए तो वहां राज भी किया. उनकी जिंदगी के हर पल को याद करने के लिए एक मंदिर बनाया गया. जहां खेले, वहां गुलेला मंदिर है.
जहां पढ़ाई की वहां वशिष्ठ मंदिर हैं. जहां बैठकर राज किया वहां मंदिर है. जहां खाना खाया वहां सीता रसोई है. जहां भरत रहे वहां मंदिर है. हनुमान मंदिर है. कोप भवन है. सुमित्रा मंदिर है. दशरथ भवन है. ऐसे बीसीयों मंदिर हैं. और इन सबकी उम्र 400-500 साल है. यानी ये मंदिर तब बने जब हिंदुस्तान पर मुगल या मुसलमानों का राज रहा.
अजीब है न! कैसे बनने दिए होंगे मुसलमानों ने ये मंदिर! उन्हें तो मंदिर तोड़ने के लिए याद किया जाता है. उनके रहते एक पूरा शहर मंदिरों में तब्दील होता रहा और उन्होंने कुछ नहीं किया! कैसे अताताई थे वे, जो मंदिरों के लिए जमीन दे रहे थे. शायद वे लोग झूठे होंगे जो बताते हैं कि जहां गुलेला मंदिर बनना था उसके लिए जमीन मुसलमान शासकों ने ही दी. दिगंबर अखाड़े में रखा वह दस्तावेज भी गलत ही होगा जिसमें लिखा है कि मुसलमान राजाओं ने मंदिरों के बनाने के लिए 500 बीघा जमीन दी. निर्मोही अखाड़े के लिए नवाब सिराजुदौला के जमीन देने की बात भी सच नहीं ही होगी.
सच तो बस बाबर है और उसकी बनवाई बाबरी मस्जिद! अब तो तुलसी भी गलत लगने लगे हैं जो 1528 के आसपास ही जन्मे थे. लोग कहते हैं कि 1528 में ही बाबर ने राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई. तुलसी ने तो देखा या सुना होगा उस बात को. बाबर राम के जन्म स्थल को तोड़ रहा था और तुलसी लिख रहे थे मांग के खाइबो मसीत में सोइबो. और फिर उन्होंने रामायण लिखा डाली. राम मंदिर के टूटने का और बाबरी मस्जिद बनने क्या तुलसी को जरा भी अफसोस न रहा होगा! कहीं लिखा क्यों नहीं!
अयोध्या में सच और झूठ अपने मायने खो चुके हैं. मुसलमान पांच पीढ़ी से वहां फूलों की खेती कर रहे हैं. उनके फूल सब मंदिरों पर उनमें बसे देवताओं पर.. राम पर चढ़ते रहे. मुसलमान वहां खड़ाऊं बनाने के पेशे में जाने कब से हैं. ऋषि मुनि, संन्यासी, राम भक्त सब मुसलमानों की बनाई खड़ाऊं पहनते रहे. सुंदर भवन मंदिर का सारा प्रबंध चार दशक तक एक मुसलमान के हाथों में रहा. 1949 में इसकी कमान संभालने वाले मुन्नू मियां 23 दिसंबर 1992 तक इसके मैनेजर रहे. जब कभी लोग कम होते और आरती के वक्त मुन्नू मियां खुद खड़ताल बजाने खड़े हो जाते तब क्या वह सोचते होंगे कि अयोध्या का सच क्या है और झूठ क्या?
अग्रवालों के बनवाए एक मंदिर की हर ईंट पर 786 लिखा है. उसके लिए सारी ईंटें राजा हुसैन अली खां ने दीं. किसे सच मानें? क्या मंदिर बनवाने वाले वे अग्रवाल सनकी थे या दीवाना था वह हुसैन अली खां जो मंदिर के लिए ईंटें दे रहा था? इस मंदिर में दुआ के लिए उठने वाले हाथ हिंदू या मुसलमान किसके हों, पहचाना ही नहीं जाता. सब आते हैं. एक नंबर 786 ने इस मंदिर को सबका बना दिया. क्या बस छह दिसंबर 1992 ही सच है! जाने कौन.
छह दिसंबर 1992 के बाद सरकार ने अयोध्या के ज्यादातर मंदिरों को अधिग्रहण में ले लिया. वहां ताले पड़ गए. आरती बंद हो गई. लोगों का आना जाना बंद हो गया. बंद दरवाजों के पीछे बैठे देवी देवता क्या कोसते होंगे कभी उन्हें जो एक गुंबद पर चढ़कर राम को छू लेने की कोशिश कर रहे थे? सूने पड़े हनुमान मंदिर या सीता रसोई में उस खून की गंध नहीं आती होगी जो राम के नाम पर अयोध्या और भारत में बहाया गया?
अयोध्या एक शहर के मसले में बदल जाने की कहानी है. अयोध्या एक तहजीब के मर जाने की कहानी है.
लेखः विवेक कुमार असरी का 6 साल पुराना लेख
Tuesday, 4 December 2018
वो मंदिर नहीं फिर से सरकार बनाना चाहते हैं देश में मूर्ख कितने हैं वो फिर आजमाना चाहते हैं
#देश #में #मूर्ख #कितने #हैं.... #वो #फिर #आजमाना #चाहते #हैं
बुलंदशहर के सायना में जो बवाल हुवा है में अपको एक बात बताना चाहता हु यह झगड़ा पूरी तरहा से प्लान कर के किया गया था ताकि हिन्दू मुस्लिम आपस में लडे मगर सब कुछ फेल हो गया में आपको एक और बात बताना चाहता हु में जब इज्तिमे में गया तो मैंने देखा हिन्दू भाई सेवा कर रहे और वो भी दिन रात मंदिर खोल दी नमाज पढ़ने के लिए उस वक़्त जब मैंने यह देखा तो मेरे मोबाइल की बैटरी खत्म हो चुकी थी मुझे लगता है यह सब हजम नही हुवा इन दंगाईयो को प्यार और मोहब्बत की जो मिशाल पेश की है बुलंदशहर वासियों ने जितनी तारीफ की जाये कम है ऐसे भाइयो को में दिल से सैल्यूट करता हू दंगा कराने की इन लोगो की साजिश नाकाम हो चुकी है में आप सब भाईयो से अपील करता हु इन लोगो के चक्कर में ना आए यह सिर्फ अपनी राजनीती की रोटिया सेकना चाहते है इनके चक्कर में आपसी रिश्ते ख़राब ना करे यह लोग आगे भी कोशिस करेंगे ऐसा माहौल पैदा करने की बस आप समझदारी का सबूत दे कोई किसी भी धर्म से हम सब आपस में मिल जुलकर रहेंगे तो यह दँगाई कभी कामयाब नही होंगे यह तस्वीरे में जो पोस्ट कर रहा हु किसी और से लेकर कर रहा हु यह दंगा फैलने से रोकने गए कुछ लोगो ने कॉल की थी इसलिए सुबोध जी वहा गए वहा कुछ नही था इंस्पेक्टर सुबोध जी की हत्या हो गयी देश का एक जाबांज सिपाही सहीद हो गया सलाम इंस्पेक्टर साहब को जिन्होंने अपनी अपनी जान की बाजी लगा दी बस में तो यही कहना चाहूँगा अगर इस आर्टिकल में कही गलती हो गयी है तो माफ करना
#नफरत #की #लाठी #छोड़ो, #लालच #का #खंजर #फेको #मेरे #देश #प्रेमियो #आपस में #प्रेम करो #देश #प्रेमियो
Maharban Ansari kairana





























