Thursday, 18 October 2018

इस्लामिया स्कूल में टीचरो को किया सम्मानित

आज इस्लामिया स्कूल में 2 टीचर सेवानिवृत्त हुए मास्टर बदरुल इस्लाम  इस मौके पर मास्टर अय्यूब जी को माला पहनाकर सम्मानित करते हुए 33 साल तक दोनों टीचरो ने स्कूल की सेवा की इनकी सेवा से बच्चों ने बहुत कामयाबी हासिल की इस मौके पर सभी स्कूल स्टाफ काफी उदास थे सभी ने मास्टर जी का सम्मान किया में भी इस मोके पर अपने आपको गोर्वान्तित महसूस कर रहा हु क्योंकि जिस स्कूल में पढा उसी स्कूल में मुझे सम्मान करने का मोका मिला जब में स्कूल में पढ़ा यह टीचर तब भी थे अल्लाह इन टीचरो को सेहत और तंदरुस्ती अता फरमाये
इस मोके पर मौजूद सभासद गय्युर अली,मुरसलीन भाई ,नोशाद भाई ,साहिद मास्टर सलमान मास्टर वसीक मास्टर वादिल बाबू शाहनवाज़ और तमाम स्कूल स्टाफ मौजूद रहा 

            मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद




Monday, 15 October 2018

मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद कैराना नगरपालिका परिषद

आज दिनांक 15 :10: 2018 को कैराना नगर पालिका में एक बोर्ड मीटिंग रखी गई जिसमें मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद ने चेयरमैन जनाब हाजी अनवर हसन के सामने अपने वार्ड 23 से सम्बन्धित्त परेशानियो  से अवगत कराया अपने वार्ड में नयी पाइपलाइन ख़राब सड़के पानी की समस्या को लेकर   समर्सिबल  और जो सड़के ठीक है उनकी नालियो की मरमत्त इमाम पर नाले के ऊपर  पुलिया को ऊँची करवांना सफाई वयवस्था को दुरुस्त कराना और नई सड़के   इस पर चेयरमैन सहाब ने जल्द ही सारी समस्या ओ को जल्द ही निस्तारण करने के लिए कहा

मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद नगरपालिका परिषद कैराना

Sunday, 14 October 2018

मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद ने वोट बनवाने में लोगो की मदद हर तरफ हो रही है सरहाना

आज दिनांक/14/10/2018/को सुबह लग भग साढ़े दस बजे मेहरबान अंसारी अंसारी वार्ड 23 सभासद कैराना नगरपालिका  ने जिन लोगों के वोट नहीं बने  थे उन लोगो के वोट बनवाये  कुछ Blo लेट आए Blo के लेट आने पर लोगो में रोष था एक Blo ड्यूटी पर आया नही लोगो को परेशानी में देखकर खुद ही मोर्चा संभाला  और लोगो को वोट बनाने में मदद में झुट गए  और लोगो से अपील की जिन के वोट नही बने वो अपने वोट बनवा ले एक एक वोट देश का भाग्य बदल सकता है अपने वोट कीमत को समझे

मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद नगरपालिका परिषद कैराना



Thursday, 14 June 2018

वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है Mohammad in Ved Upanishad & Quran Hadees

वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है Mohammad in Ved Upanishad & Quran Hadees

पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कीपैदाइश अरबी माह रबी-उल-अव्वल में हुई थी और रबी उलअव्वल के महीने में ही उनकी वफ़ात हुई। इस माह की 12 तारीख़ को उनकी वफ़ात से जोड़कर ही बारह वफ़ात कहाजाता है।

रबी उल अव्वल का मुबारक महीना चल रहा है। लिहाज़ा उनका ज़िक्र किया जाना ज़रूरी है।
पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद स. की जीवनी ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह महफ़ूज़ है। लोग उसे पढ़कर उनके बारे में जानते हैं और उनकी सच्चाई पर विश्वास करते हैं, उन्हें अपना आदर्श मानकर अपनी ज़िंदगी भी उनके उसूलों के मुताबिक़ ढालते हैं। दुनिया के जो लीडर उन्हें ईश्वर का दूत नहीं मानते, वे भी उन्हें एक महान सुधारक और अपना आदर्श मानते हैं और उनका नाम आदर से लेते हैं,
लेकिन दुनिया का दौर सिर्फ़ इतना ही नहीं है जिसे इतिहास ने महफ़ूज़ कर लिया है, कुछ ऐसी हक़ीक़तें भी हैं जिन्हें इतिहास ने महफ़ूज़ नहीं किया है और कुछ हक़ीक़तें ऐसी भी हैं जो इतिहास के दायरे से ही बाहर हैं। ये हक़ीक़तें इतनी गहरी हैं कि इन्हें गहरी समझ वाले ही याद रख पाए और इन्हें समझने के लिए समझ भी गहरी ही चाहिए।
हक़ीक़त गहरी हो और उसे भारत न जानता हो ?
यह एक असंभव बात है।
भारत का साहित्य गहरी हक़ीक़तों से लबालब भरा हुआ है। गहरी हक़ीक़तों के जानने वाले को ही पंडित कहा जाता है।
पंडित वह सत्य भी जानते हैं जिसे इतिहास ने महफ़ूज़ कर लिया और जिसे सब जानते हैं और पंडित वह परम सत्य भी जानते हैं जिसे सुरक्षित रखने का सौभाग्य केवल उन्हीं को मिला और जिसे कम लोग ही जानते हैं।
पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को भारत के वैदिक पंडित किस रूप में जानते हैं ?
यह जानने के लिए आज हम वेद भाष्यकार पंडित दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी का एक लेख यहां पेश कर रहे हैं।
आज तक लोगों ने यही जाना है कि ‘ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो ज्ञानी होय‘ लेकिन अगर ‘ज्ञान‘ के दो आखर का बोध ढंग से हो जाए तो दिलों से प्रेम के शीतल झरने ख़ुद ब ख़ुद बहने लगते हैं। यह एक साइक्लिक प्रॉसेस है।
पंडित जी का लेख पढ़कर यही अहसास होता है।
मालिक उन्हें इसका अच्छा पुरस्कार दे, आमीन !

वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी
वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है
वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2

अग्नि पूर्वोभिर्ऋषिभिरीडयो नूतनैरूत। स देवां एह वक्षति।। 2।।
अग्नि पूर्वकालीन ऋषियों द्वारा ईलन किए जाने योग्य है, और नूतनों द्वारा वह देवों को यहां एकत्रित करता है।

नूतनैरूत का अभिप्राय यह नहीं है कि वेद की दृष्टि में कुछ ऋषि ऐसे हैं जो प्राक्-वेदकालीन थे। ब्राह्मण ग्रंथ वेद का प्रामाणिक भाष्य है, जो वैदिक संस्कृत में है। उनके कुछ विशिष्ट भागों को पृथक करके आरण्यक ग्रंथों का निर्माण हुआ। जिस प्रकार श्रीमद्-भगवदगीता में उसके महत्व के कारण महाभारत से पृथक करके प्रकाशित किया गया। फिर आरण्यक ग्रंथों में से भी ब्रह्म विद्या विषयक प्रकरणों को पृथक्तः उपनिषद संज्ञा देकर प्रकाशित एवं प्रचारित किया।
आधुनिक युग के सर्वोत्तम वेदवेत्ता भगवान् ऋषि दयानंद ने संहिता ग्रंथों को वेद का आदि भाष्य माना। वेद के द्वितीय खंड यजुर्वेद का आदि भाष्य दो प्रकार के संहिता ग्रंथ समूहों पर आधारित है-
1. कृष्ण यजुर्वेद
2. शुक्ल यजुर्वेद
आधुनिक हिंदू समाज में एक हिस्सा ऐसा भी पाया जाता है जो संहिता ग्रंथों को वेद का आदि भाष्य नहीं प्रत्युत वेद माना करता है। फिर आरण्यक ब्राह्मण ग्रंथों का भाग है। ये आरण्यक ग्रंथ भी वेद हैं और उपनिषद आरण्यक ग्रंथों का भाग हैं। इसीलिए उपनिषद भी वेद हैं। उपनिषदों के आगे वेद नहीं है।
यह एक ऐसा विवादग्रस्त विषय है जो वर्तमान हिंदू समाज में भी विवादित बना हुआ है। विद्वानों का एक वर्ग अभी भी यही मानता है कि उपनिषद स्वयं वेद है और दूसरा वर्ग अपने इस निश्चित मत पर दृढ़ है कि उपनिषद वेद नहीं, प्रत्युत वेद भाष्य है।
यहां यह प्रश्न अनावश्यक है कि इन दोनों विद्वानों में से कौन सत्य है ?
सप्रतिस्थिति श्वेताश्वतर उपनिषद का परिगणन कृष्ण यजुर्वेद अंतर्गत किया जाता है। अब, यदि यह वेद है, तो यह स्वयं वेद प्रमाण है कि वेद के पहले का कोई काल वेद की दृष्टि में नहीं है, और यदि यह वेद भाष्य है तो, यह वेद के आदि भाष्य का कथन है कि सृष्टि में आज तक कोई प्राक्-वेदकाल नहीं पाया जाता।
‘यो ब्रह्मण विदधाति पूर्वं यो वै वेदांश्रच प्रहिणोति तस्मै। तण्ं ह देवमात्मबुद्धि प्रकाशं मुमुक्षुर्वे शरणमंह प्रपद्ये।‘
श्वेताश्वतरोपनिषद 6,18
‘जो सर्वप्रथम परमपुरूष का निर्माण करता है और जो उसके लिए वेद का प्रकाश करता है मोक्ष की इच्छा रखने वाला मैं उसी दिव्य गुणों वाले की शरण में जाता हूं जिसने अपनी बुद्धि का प्रकाश (वेद में) किया है।
यहां सृष्टि के सर्वप्रथम पुरूष का निर्माण करके उसके लिए ईशान द्वारा वेद का प्रकाश किए जाने की बात कही गई है।
क़ुरआन मजीद के अनुसार भी कोई ऐसा काल नहीं था जब ईशान ने अपने ज्ञान से किसी व्यक्ति को वंचित रखा हो। यही कथन इस संदर्भ में बाइबिल का है।
स्वर्गीय आचार्य शम्स नवेद उस्मानी की प्रख्यात रचना ‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ (प्रस्तुति: एस. अब्दुल्लाह तारिक़) ने इस संदर्भ में एक पृथकतः स्वतंत्र अध्याय पाया जाता है।
सरवरे कायनात (स.) ही इस सृष्टि का प्रारंभ हैं।

‘सबसे पहले मशिय्यत के अनवार से,
नक्शे रूए मुहम्मद (स.) बनाया गया
फिर उसी नक्श से मांग कर रौशनी
बज़्मे कौनो मकां को सजाया गया
-मौलाना क़ासिम नानौतवी
संस्थापक दारूल उलूम देवबंद

हदीसों (= स्मृति ग्रंथों ?) से केवल इतना ही ज्ञात नहीं होता कि रसूलुल्लाह (स.) की नुबूव्वत भगवान मनु के शरीर में आत्मा डाले जाने से पहले थी, प्रत्युत हदीसों से यह भी प्रमाणित होता है कि हज़रत मुहम्मद मुज्तबा (स.) का निर्माण संपूर्ण सृष्टि, देवों, द्यावापृथिवी और अन्य सृष्टियों और परम व्योम (= मूल में ‘अर्शे इलाही‘) से भी पहले हुई थी और फिर नूरे-अहमद (स.) ही को ईशान परब्रह्म परमेश्वर ने अन्य संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति का माध्यम बनाया।
(‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ पृ. सं. 105 उर्दू से अनुवाद, दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी।)
उक्त पुस्तक और कतिपय अन्य पुस्तकों में भी यह प्रमाणित करने के प्रयत्न किए गए हैं कि वेद में हुज़ूर स. का उल्लेखनराशंस के नाम से पाया जाता है। मेरे अपने अध्ययन के अनुसार मैं उन समस्त व्यक्तियों से क्षमा प्रार्थी हूं। जो अपने अध्ययनों द्वारा इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। मैं यह मानता हूं, और अपने अध्ययन द्वारा इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि वेद में नराशंस शब्द से कोई व्यक्ति विशेष अभिप्रेत नहीं है। उसका अभिप्राय केवल नरों द्वारा प्रशंसित मात्र है, जिससे कहीं परम पुरूष भी अभिप्रेत है, कहीं ईशान स्वयमेव भी अभिप्रेत है और कहीं अन्य व्यक्ति भी अभिप्रेत हैं। मेरे अपने अध्ययन के अनुसार वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख उससे कहीं अधिक उत्कृष्ट ढंग से है, जितने उत्कृष्ट ढंग से संदभिति मनीषियों द्वारा उनका उल्लेख पाया गया है -
‘इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न। योअस्याध्यक्षः परमेव्योमन्तसो अंग वेद यदि वा न वेद।‘
वेद 1,10,129,7
यह विविध प्रकार की सृष्टि जहां से हुई, इसे वह धारण करता है अथवा नहीं धारण करता जो इसका अध्यक्ष है परमव्योम में, वह हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता।
सामान्यतः वेद भाष्यकारों ने इस मंत्र में ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान परब्रह्म परमेश्वर अर्थ ग्रहण किया है, किन्तु इस मंत्र में एक बात ऐसी है जिससे यहां ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान अर्थ ग्रहण नहीं किया जा सकता। वह बात यह है कि इस मंत्र में सृष्टि के अध्यक्ष के विषय में कहा गया है - ‘सो अंग ! वेद यदि वा न वेद‘ ‘वह, हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता‘। ईशान के विषय में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह कोई बात नहीं जानता। फलतः यह सर्वथा स्पष्ट है कि ईशान ने यहां सृष्टि के जिस अध्यक्ष की बात की है, वह सर्वज्ञ नहीं है। मेरे अध्ययन के अनुसार यही वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख है। शब्द ‘नराशंस‘ का प्रयोग भी कई स्थानों पर उनके लिए हुआ है किन्तु सर्वत्र नहीं। इसी सृष्टि के अध्यक्ष का अनुवाद उर्दू में सरवरे कायनात स. किया जाता है।
फलतः श्वेताश्वतरोपनिषद के अनुसार वेद का सर्वप्रथम प्रकाश जिस पर हुआ। वह यही सृष्टि का अध्यक्ष है। जिसे इस्लाम में हुज़ूर स. का सृष्टि-पूर्व स्वरूप माना जाता है।
मैं जिन प्रमाणों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं, आइये अब उसका सर्वेक्षण किया जाए।
स्वर्गीय आचार्य शम्स नवेद उस्मानी की तर्जुमानी करते हुए एस. अब्दुल्लाह तारिक़ अपनी प्रख्यात रचना ‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ में लिखते हैं -
‘नीचे हम हज़रत मुजददिद अलफ़े-सानी शैख़ अहमद सरहिन्दी रह. के मक्तूबाते-रब्बानी से कतिपय हदीसें उद्धृत हैं।
प्रख्यात हदीसे-क़ुदसी में आया है, ‘मैं एक छिपा हुआ ख़ज़ानाथा, मैंने महबूब रखा कि मैं पहचाना जाऊं, फिर मैंनेमख़लूक़ को पैदा किया ताकि मैं पहचाना जाऊं।‘
सर्वप्रथम जो चीज़ इस ख़ज़ाने से प्रागट्य के रूप में समक्ष आई, वह मुहब्बत थी, जो कि मख़लूक़ात की पैदाइश का कारण हुई।
(मक्तूबाते रब्बानी, उर्दू अनुवाद, दफ़तर 3, भाग 2, पृष्ठ 160, मक्तूब 122, प्रकाशक: मदीना पब्लिशिंग कंपनी बंदर रोड कराची)
(-‘अगर अब भी न जागे तो ...‘, पृष्ठ 105, उर्दू से अनुवाद: दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी-)
यह दोनों तथ्य, जिनका उल्लेख हदीसों में इस प्रकार हुआ है, हदीसों से भी पहले हिंदू धर्मग्रंथों में इस प्रकार अभिव्यक्त की गई हैं-
‘एको ऽ हं बहु स्याम्।
‘मैं एक हूं अनेक हो जाऊं।‘
‘स वै नैव रेमे तस्मादे काकी न रमते स द्वितीयमैच्छत्।‘
शतपथ ब्राह्मण 14,3,4,3
उसने रमण नहीं किया इसीलिए एकाकी रमण नहीं होता। उसने द्वितीय की इच्छा की...।
‘यदिदं किंच मिथुनं आपिपीलिकाभ्यः तन्सर्वमसृक्षीत्। सोवेद अहं वाव सृष्टिरस्मि। अहं टि इदं सर्व असृक्षीति। ततःसृष्टिरभवत्।‘
-शतपथ ब्राह्मण 14,3,4,3
‘जो कुछ यह चींटी पर्यन्त जोड़ा है उस संपूर्ण की सृष्टि की। उसने जाना मैं ही सृष्टि हूं। मैंने ही यह सब सृष्टि की है। उससे सृष्टि हुई।‘
‘कामस्तदये समवर्तत।‘
-वेद 1,10,129,4
‘सर्वप्रथम काम भलीभांति विद्यमान था।‘

श्वेताश्वरोपनिषद और हदीसों, दोनों के अनुसार फलतः कोई प्राक्-वैदिक काल नहीं था। वेद का प्रकाश सृष्टि के आदि पुरूष पर हुआ। जिसे हिंदू इतिहास में परम पुरूष और इस्लामी साहित्य में नूरे अहमदी स. कहा गया है। ऐसी स्थिति में यह कदापि नहीं माना जा सकता है कि वेद से पहले भी किन्हीं ऋषियों का अस्तित्व था, फिर यहां किन्हें पूर्वकालीन ऋषि कहा गया है ?
वस्तुतः यह सारा भ्रम यह मानने से है कि वेद केवल सृष्टि के आदिकालीन जनों के लिए है- वेद वस्तुतः सार्वकाल्कि ग्रंथ है - वह हर काल के लोगों के लिए है -
‘देवस्य पश्य काव्यं न ममार न जीर्यति‘
-वेद 4,10,18,32
देखो दिव्य गुणों वाले के काव्य को, न मरा न पुराना होता।
वस्तुतः वेद और क़ुरआन, दोनों का एक साथ अस्तित्व नास्तिकों के लिए घोर परेशानी का कारण बना हुआ है और अंग्रेज़ इस संभावना से आतंकित थे कि यदि यह रहस्य हिंदुओं और मुसलमानों पर खुल गया कि वेद और क़ुरआन, दोनों की सैद्धांतिक शिक्षाएं सर्वथा एक समान हैं और दोनों एक ही धर्म के आदि और अंतिम ग्रंथ हैं, तो हिंदुओं और मुसलमानों में वह मतैक्य संस्थापित होगा कि उन्हें हिंदुस्तान से पलायताम की स्थिति में आने के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं रहेगा। यही कारण है कि अंग्रेज़ों ने वेद के बहुदेवोपास्यवादी अनुवाद कराना अपना सर्वप्रथम कार्य निश्चित किया।
किंतु वेद दिव्य गुणों वाले का वह काव्य है, जो न मरा न पुराना होता। जब वेद इस दावे के साथ अपने आप को सृष्टि के आदि में प्रस्तुत कर रहा था तो यह प्रगट है कि उसमें केवल सृष्टि के आदिकाल के दृष्टिकोण से बातें नहीं की जा सकती थीं। उसमें सृष्टि के आदिकाल से आगे के काल की दृष्टिकोण से भी बातें की जानी परमावश्यक थीं, और ‘पूर्वऋषि‘ ‘पहले के ऋषि‘ सृष्टि के आदिकाल में नहीं तो उसके उपरांत तो पाए जाने ही थे। फलतः विल्सन और ग्रिफ़िथ ने जो संदेह इस मंत्र में उत्पन्न करने का प्रयास किया है, वह वेद के इस मंत्र का ऐसा भाष्य करने से उत्पन्न होता है जो वेदमंत्र (वेद 4,10,8,32) से टकराता है। पाश्चात्य महानुभावों ने अपने अनुवादों और भाष्यों में इस बात का लेशमात्र भी ध्यान नहीं रखा है कि वे अन्य मंत्रों के अनुवादों और भाष्यों से न टकराएं। ऐसे भाष्य और ऐसे अनुवाद केवल ऐसे ही लोगों के लिए मान्य हो सकते हैं जिन्होंने अपने सामान्य ज्ञान तक का प्रयोग वेद को समझाने के लिए न करने की क़सम खा रखी है। वेद ब्रह्मवाक्य है, कलाम ए इलाही है अथवा कम से कम उसका दावा तो अपने विषय में यही है। जिसका कोई तर्कसंगत तथ्यपरक खंडन आज तक किसी के द्वारा नहीं किया जा सका। ऐसी स्थिति में उसके साथ ऐसा खिलवाड़ केवल वही व्यक्ति कर सकता है अथवा वही व्यक्ति समूह जिसे ईशान का लेशमात्र भी भय न हो-
‘जब उनसे कहा जाता है कि ज़मीन में उत्पात न फैलाओ तो कहते हैं हम तो सुधार करने वाले लोग हैं। जान लो वास्तव में यही लोग उत्पात फैलाने वाले हैं।, परंतु इन्हें इसका ज्ञान नहीं है। जब इनसे कहा जाता है कि इस तरह ईमान लाओ, जिस तरह लोग ईमान लाए हैं, तो कहते हैं क्या हम उस तरह ईमान लाएं जिस तरह मूर्ख लोग ईमान लाए हैं ?
जान लो ! मूर्ख यही लोग हैं, परंतु इन्हें ज्ञात नहीं है।‘
-क़ुरआन मजीद 2,11-13
(‘विश्व एकता संदेश‘ पाक्षिक, पृष्ठ संख्या 7 व 8 पर वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी द्वारा लिखित ‘वेद आदि ग्रन्थ और क़ुरआन अन्तिम ग्रन्थ है‘, अंक 19-20, अक्तूबर 1994, रामपुर, उ. प्र.)

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पोस्ट के विषय को समझने के लिए ये दो किताबें भी उपयोगी हैं, 
1. अगर अब भी न जागे तो ...
लेखक - आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी रह.

2. नराशंस और अंतिम ऋषि
लेखक - डा. वेद प्रकाश उपाध्याय

Friday, 9 March 2018

आओ बच्चो स्कूल चले हम

आओ बच्चो स्कूल चले हम ,विद्यालय कन्या 3
            कलालान  स्कूल 5 सरकारी स्कूल के
बच्चों ने रैली निकालकर बड़ों को बच्चों का नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने , घर-घर जाकर  कहा आओ चलें स्कूल। इस बार सरकारी स्कूलों में भी कान्वेंट की तरह अप्रैल में ही बच्चों का प्रवेश होगा। सर्व शिक्षा अभियान के बैनर तले शुक्रवार को स्कूल से लेकर ईदगाह से लेकर इमाम गेट अफगानान घोसा चुंगी साददे  का कुआ मक्का मस्जिद काजी का बाग  mp साहब के कब्रिस्तान तक  में स्कूली बच्चों द्वारा जागरूकता रैली निकाली गई। रैली की शुरूआत वार्ड 23 सभासद मेहरबान अंसारी  ने की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के हर एक बच्चे को स्कूल तक लाना और उन्हें बेहतर तालीम मुहैया कराना है। बच्चो का खूब धियान रखा जा रहा है 1 अप्रैल से बच्चो के दाखले होंगे इसलिए अपने बच्चो को दाखिला दिलाइए  रैली में बच्चों के साथ ही विद्यालय के मास्टर मुकीम ने बच्चो को आगे बढने के लिए ज्यादा से जयादा बच्चो से पढने की अपील की टीचर शकीला ने भी बडी बहादुरी से बच्चो की होसला अफजाई की और पूरी रैली मे मौजूद रही  स्कूल स्टाफ । सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद नगरपालिका परिषद कैराना maharban Ansari




Thursday, 14 December 2017

मौत के 9 साल बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं सांसद मुनव्वर हसन

कैरानाः मौत के 9 साल बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं सांसद मुनव्वर हसन
पूर्व सांसद चौधरी मुनव्वर हसन और उनके बेटे और वर्तमान विधायक नाहिद हसन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े नेता रहे मुनव्वर हसन की मौत को 9 साल हो गए। लेकिन क्या हिंदू, क्या मुसलमान, इलाके के तमाम लोगों के दिलों में आज भी उनकी यादें जिंदा हैं।
में मेहरबान अंसारीl
"मैं उस दिन का गवाह हूं। कैराना इतना चुप कभी नही हुआ। 50 हजार की आबादी के कैराना में हर घर में मातम था। किसी चूल्हे में आंच नहीं थी। कैराना की आबादी 50 हजार थी, मगर उस दिन कैराना में लाखों लोग थे। किसानों का सबसे बड़ा नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत अपने सर को दोनों हाथों के बीच दबाए उदास बैठा था। कैराना के कद्दावर नेता हुकुम सिंह को लोगों ने मुनव्वर के लिए रोते हुए देखा।”उस समय की मुख्यमंत्री मायावती अपना उसूल तोड़कर मुनव्वर की मिट्टी में शरीक होने आयी थीं। 3 किमी तक रस्सी बांधकर मायावती के लिए रास्ता बनाया गया था। पूरा कैराना बंद था, एक दुकान कहीं नहीं खुली थी। कैराना बिल्कुल चुप था। इससे पहले कैराना इतना चुप कभी नहीं हुआ था और इतना बड़ा नेता भी कैराना में इससे पहले कभी नहीं हुआ था। उस दिन आधी रात के बाद बसपा सरकार के ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की बेटी की शादी में शिरकत कर लौट रहे सांसद मुनव्वर हसन की कार और एक ट्रक में हुई टक्कर में उनकी मौत हो गई।मौत से कुछ दिन पहले ही उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। मुनव्वर हसन भारत के राजनितिक इतिहास के ऐसे एकमात्र नेता हैं जिन्होंने भारत के चारों सदन- राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद का प्रतिनिधित्व किया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों में उनकी अदुभुत लोकप्रियता थी। कैराना के शायर रियासत अली कहते हैं कि एमपी साहब को 10 हजार से ज्यादा नाम जबानी याद थे। आज उनके बेटे नाहिद हसन कैराना से विधायक हैं। मौत के समय मुनव्वर 44 साल के थे। कैराना के मौलाना नसीम बताते हैं, "उनकी पसंदीदगी का आलम यह है कि आप रिक्शेवाले से कहिये कि एमपी साहब के घर जाना है वो मुनव्वर हसन के घर पहुंचा देगा, जबकि एमपी और भी हैं, मगर दिल में मुनव्वर बसे हैं।कैराना के मशहूर आइसक्रीम विक्रेता जाहिद कहते हैं, "मुनव्वर हसन जैसा नेता यहां कभी पैदा नहीं हो सकता। उनमें लोगों को अपना बना लेने की कला थी। रेहड़ी पर कबाब बेचने वाले महमूद कहते हैं, "एमपी साहब मेरे दोस्त थे, गाड़ी रोककर अक्सर कबाब खाते थे। वो ऐसे बात करते थे जैसे अपने हों। जाहिद कहते हैं, "इसलिए लोग उन्हें गरीबों का नेता कहते थे, एकदम जमीनी नेता। वो किस तरह के नेता थे, यह राशिद अली बताते हैं, 2007 में मुनव्वर हसन को अलमासपुर
में हमने एक ट्रेक्टर एजेंसी की ओपनिंग के लिए बुलाया। वो उस समय सांसद थे। 100 से ज्यादा गाड़ियों का लंबा काफिला आया। हम मुनव्वर को बड़ी गाडी में समझ रहे थे। मगर वो मारुती 800 से उतरे। मीरापुर के पूर्व चेयरमैन जहीर कुरैशी कहते हैं, "मुनव्वर किसी को नहीं कहते थे कि मेरे साथ चलो, लोग खुद ब खुद उनके साथ चल देते थे।जानसठ के अब्दुल्ला ठेली पर केले बेचते थे। वो बताते हैं, “एक दिन मुनव्वर से कहीं मिले तो मुनव्वर ने हमारा नाम याद कर लिया। अब एमपी साहब भीड़ के सामने कहें, "और अब्दुल्ला भाई! कैसे हो, तो दीवानगी लाजिम थी। कैराना में मुनव्वर हसन अक्सर लोगों के घर में चले जाते और कहते, "ला लाल्ली (स्थानीय जबान में बहन ) खाना दे, भूख लग रही है।” नसीम कहते हैं कि इससे उन्हें पता चल जाता था कि उनके लोगों की वास्तविक हालत क्या है।मुनव्वर हसन के पिता अख्तर हसन बसपा सुप्रीमो मायावती को 2 लाख वोटों से हराकर सांसद बने थे। उनका चौधरी परिवार इलाके का सबसे बड़ा जमींदार परिवार है। मुनव्वर के दादा चौधरी बुन्दू और वर्तमान सांसद हुकुम सिंह आपस में भाई हैं। 1991 में मुनव्वर हसन ने अपने पहले विधानसभा चुनाव में अपने 'दादा ' हुकुम सिंह को जोरदार हार का मजा चखा दिया। 1993 में फिर से चुनाव हुआ। फिर कैराना से मुनव्वर ने हुकुम सिंह को हरा दिया। 1996 में वो सांसद बन गए और 1998 में उन्हें समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा में भेज दिया। समाजवादी पार्टी में उनके साथी राशिद सिद्दीकी कहते हैं, "मुनव्वर भाई का जलवा ऐसा था कि नेता जी मुलायम सिंह यादव शिवपाल जी की बात टाल सकते थे मगर उनकी नहीं। जो अधिकारी जनता के काम नहीं करता था वो उनके एक  फोन पर हटा दिया जाता था। शामली के नफीस राणा के अनुसार, “उन्होंने गरीबों की बेइंतहा दुआ ली। यहां सूदखोरों का आतंक था। वो गरीब को 5 हजार रुपए देते और 50 हजार कर देते थे। फिर उसका घर हड़प लेते थे। यह आतंक एमपी साहब ने खत्म कराया। 50 से ज्यादा गरीबों के घर उन्हें वापस कराए। उनकी मौत के बाद यह मातम इसलिए था।”2003 में वो एमएलसी बन गए इसके बाद गिनीज बुक में उनका नाम दर्ज हुआ और उपहार में लंदन में उन्हें जगह मिली। जब मुनव्वर हसन की मौत हुई तो उनके इकलौते बेटे नाहिद हसन आस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे थे। उनके करीबी बताते हैं कि वो कभी नहीं चाहते थे कि नाहिद सियासत करें। दरअसल वो हर रंग देख चुके थे। उनकी मौत के तुरंत बाद मायावती ने उनकी पत्नी तब्बसुम हसन को उनकी जगह लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया। 2009 के आम चुनाव में तब्बसुम ने हुकुम सिंह को हरा दिया। हाल ही में उनकी बेटी इकरा हसन जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुकी है। 1 दिसम्बर को आये निकाय चुनाव परिणाम में उनके भाई अनवर हसन कैराना के चेयरमैन चुने गए हैं।मुजफ्फरनगर में उनके बंगले पर एक समय सबसे ज्यादा फरियादियों की भीड़ जुटती थी। अब किसी नेता के दरबार में इतनी भीड़ नही जुटती। नाहिद अब कैराना से विद्यायक हैं। दूसरा मुनव्वरअब तक कोई नहीं बन पाया है। मेहरबान अंसारी समाज सेवी बताते हैं, "मुनव्वर हसन लक्जरी नेता नहीं थे। उनका देसी स्टाइल ही उनकी जान था। आजकल कई नेता मुनव्वर स्टाइल की नकल करते हैं। मगर वो परिपक्वता और काबिलयत अभी उनके बेटे में भी नहीं आ पाई है। जनता उनकी दीवानी थी। वो कहीं भी लाख आदमी इकट्ठा करने की क्षमता रखते थे। इसीलिए फोन पर "सुनो मुनव्वर बोल रहा हूं" सुनकर अफसर हिल जाते थे।