Friday, 9 March 2018

आओ बच्चो स्कूल चले हम

आओ बच्चो स्कूल चले हम ,विद्यालय कन्या 3
            कलालान  स्कूल 5 सरकारी स्कूल के
बच्चों ने रैली निकालकर बड़ों को बच्चों का नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने , घर-घर जाकर  कहा आओ चलें स्कूल। इस बार सरकारी स्कूलों में भी कान्वेंट की तरह अप्रैल में ही बच्चों का प्रवेश होगा। सर्व शिक्षा अभियान के बैनर तले शुक्रवार को स्कूल से लेकर ईदगाह से लेकर इमाम गेट अफगानान घोसा चुंगी साददे  का कुआ मक्का मस्जिद काजी का बाग  mp साहब के कब्रिस्तान तक  में स्कूली बच्चों द्वारा जागरूकता रैली निकाली गई। रैली की शुरूआत वार्ड 23 सभासद मेहरबान अंसारी  ने की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के हर एक बच्चे को स्कूल तक लाना और उन्हें बेहतर तालीम मुहैया कराना है। बच्चो का खूब धियान रखा जा रहा है 1 अप्रैल से बच्चो के दाखले होंगे इसलिए अपने बच्चो को दाखिला दिलाइए  रैली में बच्चों के साथ ही विद्यालय के मास्टर मुकीम ने बच्चो को आगे बढने के लिए ज्यादा से जयादा बच्चो से पढने की अपील की टीचर शकीला ने भी बडी बहादुरी से बच्चो की होसला अफजाई की और पूरी रैली मे मौजूद रही  स्कूल स्टाफ । सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

मेहरबान अंसारी वार्ड 23 सभासद नगरपालिका परिषद कैराना maharban Ansari




Thursday, 14 December 2017

मौत के 9 साल बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं सांसद मुनव्वर हसन

कैरानाः मौत के 9 साल बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं सांसद मुनव्वर हसन
पूर्व सांसद चौधरी मुनव्वर हसन और उनके बेटे और वर्तमान विधायक नाहिद हसन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े नेता रहे मुनव्वर हसन की मौत को 9 साल हो गए। लेकिन क्या हिंदू, क्या मुसलमान, इलाके के तमाम लोगों के दिलों में आज भी उनकी यादें जिंदा हैं।
में मेहरबान अंसारीl
"मैं उस दिन का गवाह हूं। कैराना इतना चुप कभी नही हुआ। 50 हजार की आबादी के कैराना में हर घर में मातम था। किसी चूल्हे में आंच नहीं थी। कैराना की आबादी 50 हजार थी, मगर उस दिन कैराना में लाखों लोग थे। किसानों का सबसे बड़ा नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत अपने सर को दोनों हाथों के बीच दबाए उदास बैठा था। कैराना के कद्दावर नेता हुकुम सिंह को लोगों ने मुनव्वर के लिए रोते हुए देखा।”उस समय की मुख्यमंत्री मायावती अपना उसूल तोड़कर मुनव्वर की मिट्टी में शरीक होने आयी थीं। 3 किमी तक रस्सी बांधकर मायावती के लिए रास्ता बनाया गया था। पूरा कैराना बंद था, एक दुकान कहीं नहीं खुली थी। कैराना बिल्कुल चुप था। इससे पहले कैराना इतना चुप कभी नहीं हुआ था और इतना बड़ा नेता भी कैराना में इससे पहले कभी नहीं हुआ था। उस दिन आधी रात के बाद बसपा सरकार के ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की बेटी की शादी में शिरकत कर लौट रहे सांसद मुनव्वर हसन की कार और एक ट्रक में हुई टक्कर में उनकी मौत हो गई।मौत से कुछ दिन पहले ही उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। मुनव्वर हसन भारत के राजनितिक इतिहास के ऐसे एकमात्र नेता हैं जिन्होंने भारत के चारों सदन- राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद का प्रतिनिधित्व किया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों में उनकी अदुभुत लोकप्रियता थी। कैराना के शायर रियासत अली कहते हैं कि एमपी साहब को 10 हजार से ज्यादा नाम जबानी याद थे। आज उनके बेटे नाहिद हसन कैराना से विधायक हैं। मौत के समय मुनव्वर 44 साल के थे। कैराना के मौलाना नसीम बताते हैं, "उनकी पसंदीदगी का आलम यह है कि आप रिक्शेवाले से कहिये कि एमपी साहब के घर जाना है वो मुनव्वर हसन के घर पहुंचा देगा, जबकि एमपी और भी हैं, मगर दिल में मुनव्वर बसे हैं।कैराना के मशहूर आइसक्रीम विक्रेता जाहिद कहते हैं, "मुनव्वर हसन जैसा नेता यहां कभी पैदा नहीं हो सकता। उनमें लोगों को अपना बना लेने की कला थी। रेहड़ी पर कबाब बेचने वाले महमूद कहते हैं, "एमपी साहब मेरे दोस्त थे, गाड़ी रोककर अक्सर कबाब खाते थे। वो ऐसे बात करते थे जैसे अपने हों। जाहिद कहते हैं, "इसलिए लोग उन्हें गरीबों का नेता कहते थे, एकदम जमीनी नेता। वो किस तरह के नेता थे, यह राशिद अली बताते हैं, 2007 में मुनव्वर हसन को अलमासपुर
में हमने एक ट्रेक्टर एजेंसी की ओपनिंग के लिए बुलाया। वो उस समय सांसद थे। 100 से ज्यादा गाड़ियों का लंबा काफिला आया। हम मुनव्वर को बड़ी गाडी में समझ रहे थे। मगर वो मारुती 800 से उतरे। मीरापुर के पूर्व चेयरमैन जहीर कुरैशी कहते हैं, "मुनव्वर किसी को नहीं कहते थे कि मेरे साथ चलो, लोग खुद ब खुद उनके साथ चल देते थे।जानसठ के अब्दुल्ला ठेली पर केले बेचते थे। वो बताते हैं, “एक दिन मुनव्वर से कहीं मिले तो मुनव्वर ने हमारा नाम याद कर लिया। अब एमपी साहब भीड़ के सामने कहें, "और अब्दुल्ला भाई! कैसे हो, तो दीवानगी लाजिम थी। कैराना में मुनव्वर हसन अक्सर लोगों के घर में चले जाते और कहते, "ला लाल्ली (स्थानीय जबान में बहन ) खाना दे, भूख लग रही है।” नसीम कहते हैं कि इससे उन्हें पता चल जाता था कि उनके लोगों की वास्तविक हालत क्या है।मुनव्वर हसन के पिता अख्तर हसन बसपा सुप्रीमो मायावती को 2 लाख वोटों से हराकर सांसद बने थे। उनका चौधरी परिवार इलाके का सबसे बड़ा जमींदार परिवार है। मुनव्वर के दादा चौधरी बुन्दू और वर्तमान सांसद हुकुम सिंह आपस में भाई हैं। 1991 में मुनव्वर हसन ने अपने पहले विधानसभा चुनाव में अपने 'दादा ' हुकुम सिंह को जोरदार हार का मजा चखा दिया। 1993 में फिर से चुनाव हुआ। फिर कैराना से मुनव्वर ने हुकुम सिंह को हरा दिया। 1996 में वो सांसद बन गए और 1998 में उन्हें समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा में भेज दिया। समाजवादी पार्टी में उनके साथी राशिद सिद्दीकी कहते हैं, "मुनव्वर भाई का जलवा ऐसा था कि नेता जी मुलायम सिंह यादव शिवपाल जी की बात टाल सकते थे मगर उनकी नहीं। जो अधिकारी जनता के काम नहीं करता था वो उनके एक  फोन पर हटा दिया जाता था। शामली के नफीस राणा के अनुसार, “उन्होंने गरीबों की बेइंतहा दुआ ली। यहां सूदखोरों का आतंक था। वो गरीब को 5 हजार रुपए देते और 50 हजार कर देते थे। फिर उसका घर हड़प लेते थे। यह आतंक एमपी साहब ने खत्म कराया। 50 से ज्यादा गरीबों के घर उन्हें वापस कराए। उनकी मौत के बाद यह मातम इसलिए था।”2003 में वो एमएलसी बन गए इसके बाद गिनीज बुक में उनका नाम दर्ज हुआ और उपहार में लंदन में उन्हें जगह मिली। जब मुनव्वर हसन की मौत हुई तो उनके इकलौते बेटे नाहिद हसन आस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे थे। उनके करीबी बताते हैं कि वो कभी नहीं चाहते थे कि नाहिद सियासत करें। दरअसल वो हर रंग देख चुके थे। उनकी मौत के तुरंत बाद मायावती ने उनकी पत्नी तब्बसुम हसन को उनकी जगह लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया। 2009 के आम चुनाव में तब्बसुम ने हुकुम सिंह को हरा दिया। हाल ही में उनकी बेटी इकरा हसन जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुकी है। 1 दिसम्बर को आये निकाय चुनाव परिणाम में उनके भाई अनवर हसन कैराना के चेयरमैन चुने गए हैं।मुजफ्फरनगर में उनके बंगले पर एक समय सबसे ज्यादा फरियादियों की भीड़ जुटती थी। अब किसी नेता के दरबार में इतनी भीड़ नही जुटती। नाहिद अब कैराना से विद्यायक हैं। दूसरा मुनव्वरअब तक कोई नहीं बन पाया है। मेहरबान अंसारी समाज सेवी बताते हैं, "मुनव्वर हसन लक्जरी नेता नहीं थे। उनका देसी स्टाइल ही उनकी जान था। आजकल कई नेता मुनव्वर स्टाइल की नकल करते हैं। मगर वो परिपक्वता और काबिलयत अभी उनके बेटे में भी नहीं आ पाई है। जनता उनकी दीवानी थी। वो कहीं भी लाख आदमी इकट्ठा करने की क्षमता रखते थे। इसीलिए फोन पर "सुनो मुनव्वर बोल रहा हूं" सुनकर अफसर हिल जाते थे।





Saturday, 9 December 2017

भारत मे कितने जिले

*भारत मे कुल कितने जिले है*

*राज्यों में जिलों की संख्या*- 695

*@musheerkhantiger*

आंध्र प्रदेश - 13,
अरुणाचल प्रदेश - 21
असम - 33
बिहार - 38
छत्तीसगढ़ - 27
गोवा - 02
गुजरात - 33
हरियाणा - 22
हिमाचल - 12
जम्मू-कश्मीर - 22
झारखंड - 24
कर्नाटक - 30
केरल - 14
मध्य प्रदेश - 51
महाराष्ट्र - 36
मणिपुर - 16
मेघालय - 11
मिजोरम - 08
नगालैंड - 11
उड़ीसा - 30
पंजाब - 22
राजस्थान - 33
सिक्किम - 04
तमिलनाडु - 32
तेलंगाना - 31
त्रिपुरा - 08
उत्तराखंड - 13
उत्तर प्रदेश - 75
पश्चिम बंगाल - 21

*केन्द्र शासित प्रदेश में जिलों की संख्या* - 21

*@musheerkhantiger*

अंडमान निकोबार - 03,
चंडीगढ़ - 01,
दादरा-नगर हवेली - 01,
दमण-दीव - 02,
लक्षद्वीप - 01,
दिल्ली - 09,
पुदुच्चेरी - 04

*@musheerkhantiger*

*भारत में कुल जिलों की संख्या अक्टूबर 2017 तक= 695 + 21 = 716*

*अगर कोई आपसे यह प्रश्न पूछे कि भारत में कितने जिले हैं तो आप फुल कॉन्फिडेंस साथ बता सकते हैं कि भारत में अब 716 जिले हैं*

Friday, 29 September 2017

इस्लाम में पेट के बल सोने के लिए क्यों मना किया गया है, जानिए !!!*

*इस्लाम में पेट के बल सोने के लिए क्यों मना किया गया है, जानिए !!!*

इसमें कोई अचरज की बात नहीं कि जो कुछ भी आज विज्ञान खोजबीन कर रहा हैं और दुनिया को बता रहा हैं वो सब कुछ इस्लाम हमें कुरान और पेगम्बर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद (स•अ•व•) ﷺ के जरिए से 1500 वर्ष पहले ही बता चुका हैं। इस तथ्य को दुनिया के कई जाने माने वेज्ञानिको, इतिहासकारों और चिकित्सको ने सत्यापित भी किया हैं। ऐसा ही इस्लाम का एक तथ्य आज आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूँ और वो ये हैं कि इस्लाम ने अपने मानने वालों को ये नसीहत दी हैं कि वे “पेट के बल सोने से बचें” मतलब कि उल्टे न सोयें।
दरअसल ये बात लगभग 1400 वर्ष पहले की हैं जब एक बार पेगम्बर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद (स•अ•व•) ﷺ के घर कुछ मेहमान पहुंचे और एक रात वही ठहरें। रात में पेगम्बर ए इस्लाम मेहमानों को देखने के लिए उठे तो उनमें से एक व्यक्ति पेट के बल सो रहा था तो आपने उस व्यक्ति को जगाकर कहा कि पेट के बल सोना अल्लाह को पसंद नहीं हैं क्योंकि ये तरीका नर्क में सोने वालों का हैं। जब मैनें इस हदीस को पढ़ा तो अपने आप को रोक नहीं पाया और इसकी रिसर्च में जुट गया। मेरे मन में एक ही सवाल था कि पेगम्बर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद (स•अ•व•)ﷺ ने पेट के बल सोने से क्यों मना किया?
वैसे तो मैंने इंटरनेट पर इस सवाल से संबंधित कई रिपोर्ट और लेख पढ़ें लेकिन मुझे उन सब पर इतना विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब मैंने अमेरिका के सबसे बड़े Chiropractic (एक चिकित्सा पद्धति) के Dr. Jan Lefkovitz की रिपोर्ट पढ़ने पर मुझे जवाब मिल गया कि क्यों इस्लाम पेट के बल सोने से मना करता हैं। दरअसल Dr. Jan Lefkovitz ने अपनी रिपोर्ट में लिखा हैं कि पेट के बल सोना सबसे खतरनाक सिद्ध होता हैं क्योंकि इससे हमारी (Spine) रीढ की हड्डी कमजोर हो जाती हैं जिसके कारण हमारा तंत्रिका तंत्र असंतुलित हो जाता हैं और हमारी गर्दन और कमर में गम्भीर समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। और जो लोग ज्यादातर पेट के बल सोते हैं उन्हें आगे चलकर नींद न आने की बीमारी भी लग जाती हैं।
इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो पेट के बल सोना चाहेंगा। तो हमें गर्व होना चाहिए पेगम्बर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद (स•अ•व•) ﷺ पर कि जो बातें विज्ञान हमे आज बता रहा हैं वो ही बातें उन्होंने 1500 वर्ष पहले ही बता दी। आप से गुजारिश हैं अगर आपको ये लेख पसंद आये तो इसे दूसरों के साथ जरूर शेयर करें ताकि सभी को इस्लाम की वास्तविक शिक्षा की जानकारी मिल सके।
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Sunday, 24 September 2017

तेरी बुराइयो को हर अखबार कहता है

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है,
और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है   //
*ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है  //
तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* कहता है  //
*थक*  गया है हर *शख़्स* काम करते करते  //
तू इसे *अमीरी* का *बाज़ार* कहता है।
*गांव*  चलो *वक्त ही वक्त*  है सबके पास  !!
तेरी सारी *फ़ुर्सत* तेरा *इतवार* कहता है //
*मौन*  होकर *फोन* पर *रिश्ते* निभाए जा रहे हैं  //
तू इस *मशीनी दौर*  को *परिवार* कहता है //
जिनकी *सेवा* में *खपा*  देते थे जीवन सारा,
तू उन *माँ बाप*  को अब *भार* कहता है  //
*वो* मिलने आते थे तो *कलेजा* साथ लाते थे,
तू *दस्तूर*  निभाने को *रिश्तेदार* कहता है //
बड़े-बड़े *मसले* हल करती थी *पंचायतें* //
तु  अंधी *भ्रष्ट दलीलों* को *दरबार*  कहता है //
बैठ जाते थे *अपने पराये* सब *बैलगाडी* में  //
पूरा *परिवार*  भी न बैठ पाये उसे तू *कार* कहता है  //
अब *बच्चे* भी *बड़ों* का *अदब* भूल बैठे हैं //
तू इस *नये दौर*  को *संस्कार* कहता है  *.//*
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
        *मेहरबान अंसारी*


Saturday, 16 September 2017

मेरी कहानी maharban Ansari

*इंसानियत# आज भी जिन्दा है

आप सभी की दुवाओ से प्रवेज़ %इस्लाम नाम का बच्चा मिल गया है दोस्तो मे आपको आज एक ऐसे इंसान से के बारे बताता जिसकी इंसानियत की वजह से  यह बच्चा अपने माँ बाप से मिल पाया चलो आब बात करते है प्रवेज़ की यह बच्चा 9/9/2017 को सुबह 10 बजे घर से चला गया शाम तक बच्चा घर वापस नही आया तो घर वाले परेशान हो गए सभी रिश्ते दारो से फ़ोन करके पता किया नही मिला इस बच्चे की माँ का रो रो कर बुरा हाल था  इस के घर वालो से मैंने पुछा आखिर ऐसा क्या हूआ जो घर से चला गया बच्चे के पिता इस्लाम ने बताया  आगे पढना नही चाहता  मैंने पूछा किसी ने मारा तो नही इस्लाम भाई ने कहा ऐसी कोई बात नही ह्ई फिर लगातार  ढुंढने पर भी नही मिला 13 तरिक क़ी शाम को एक कॉल आया कपूरी गांव से फोन पर जो आदमी था उसने अपना परिचय मुहम्मद जनिशार बताया और कहा आपका बेटा मेरे पास है आप आकर ले जाओ नही तो कल में आपके पास लेकर आऊंगा बस फोन आत घर वालो की खुशी का ठीकाना ना रहा फिर हम सब शाम को ही निकल लिए कपूरी गांव  जो सहारनपुर जिले के अमबेहटा पीर से 7 किलोमीटर पड़ता हम है शाम को कैराना से 7 बजे पाँच लोग मुस्तफा भाई इस्लाम बच्चे का पिता मेहरबान अंसारी एक भाई नईम मुस्तक़ीम भाई हम रात को दस बजे गाँव पाउचे घर पर पोछते ही जनिशार भाई ने हमारा स्वागत किया एक दूसरे का हाल चाल पूछने के बाद मैंने पूछा जनिशार भाई यह आपके घर तक कैसे पौछा जनिशार भाई ने बताया मे ट्रक चलाता हु मे सहारनपुर होटल पे खाना खाने के लिए गया मे अक्सर वहा जाता हु मैने होटल वाले से पूछा भाई यह बच्चा किसका है होटल वाले ने पहले तो गोल मोल कर के बताया फिर मैंने सख्ती से पूछा तो उसने कहा यह बच्चा आज ही आया है आज शाम तक के पैस मैंनेे इसको दे दिये है फिर मैंने इसका एड्रेस मालूम किया इसने कुछ नही बताया फिर मे परेशान हो गया ना जाने किसका बच्चा है इसके घर वाले परेशान होंगे फिर मैंने इस बच्चे को इसके घर वापस पउचने की ठानी होटल वाले से मैंने बात करके इसको घर ले आया मेरी घर वाली ने पूछा मैंने पूरी बात बताई मेरा बेटा हिदायत भी खुश हुवा बोला अब हम दो भाई हो गए पूरी बात खत्म होते ही इतने मे आवेश भाई हाथ में चाय की ट्रे लिए खड़े थे आवेश भाई ने हम सबको चाय पिलाइ चाय पिने के बाद हम बच्चे को लेकर चलने लगे  तो जनिशार भाई का लड़का हिदायत रोने लगा अब्बु भाई को ना जाने दो रात के 11 :30 बज चुके थे फिर हम सब से मिल  कर वापस घर चल दिए इस कहानी को लिखने का मेरा मकशद जनिशार भाई की बात को सबके सामने लाने का था अगर कोई गलती हो गयी हो तो माफ करना मैंने पहली बार कोई कहानी लिखी है अगर आपको सही लगे तो जरुर बताना
मेहरबान अंसारी maharban Ansari